चलो मस्त तुम तो धरा डोल देगी ।
अगर तुम हुंकारों चिता बोल देगी ॥
बनो साहसी सेतु सागर पे बांधो ।
समुन्दर की लहरों को तुम दास कर लो ॥
धरा तो तुम्हारे बहुत सन्निकट है ।
गगन ,रश्मियाँ, मेघ तुम पास कर लो॥
कि अमरत्व जीवन में लेकर न आना ।
कि पुरुषत्व ललकार पर मत भुलाना ॥
मगर देख लो हो सके इतना करना ।
कटे सर भले सर कभी न झुकाना ॥
Tuesday, January 26, 2010
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